मनुष्य रूप में बेताल प्रकट होता है और जीवन भर के दास की तरह साधक के सारे कार्यों को संपादित करता है।साधक के साथ सदैव बना रहता है और प्रतिपल उसकी रक्षा भी करता है। प्रकृति अस्त्र-शस्त्र उस मनुष्य का कुछ भी अहित नहीं कर सकते हैं। ना तो उसके जीवन में दुर्घटना होती है और ना ही उसकी अकाल मृत्य